ना रोज़गार, ना वेतन – क्या ताप्ती मिल के नाम पर मजदूरों से धोखा- रघुवंशी

बुरहानपुर की ताप्ती मिल को बंद हुए लगभग 7 साल होने को आ रहे है,जिससे यहां के सेकड़ो मजदूरो पर रोजी रोटी का संकट आ गया,इतने वर्षों उन्होंने कैसे अपना घर परिवार चलाया,कैसे जीवन यापन किया इस बात की फिक्र कभी भी ना बुरहानपुर के विधायक ने की,ना सांसद ने की,मुख्यमंत्री से लेकर प्रधानमंत्री तक इस कि आवाज किसी भी भाजपाई नेता ने कभी नही उठाई,किन्तु आज अचानक विधायक,सांसद का मिल में जाकर नोटंकी करना पूरे लालबाग को बड़ा अजीब लगा,हालांकि उनसे उम्मीद मिल मजदूरों को आज भी नही है,अगर इनके मन मे कुछ अच्छा करने का विचार होता तो सीधे मुख्यमंत्री,प्रधानमंत्री से इस मिल के लिए घोषणा कराते।

उक्त आरोप लगाते हुए इंटक के संरक्षक अजयसिंह रघुवंशी ने आज मिल में गए सांसद,विधायक के दौरे पर टिप्पणी की।

रघुवंशी ने कहा कि ताज्जुब इस बात का है कि इतने वर्षों में इन्हें कभी भी मजदूरों की याद नही आई,जिन मजदूरों को आधा वेतन दिया जा रहा था,वो भी कई महीनों पूर्व बंद हो गया,जो मजदूर आज दिन रात मिल में कार्यरत है उन्हें भी वेतन नही दिया जा रहा है।फिर आज अचानक ऐसा क्या हो गया कि इन्हें मजदूरों ने प्रेम उमड़ गया। रघुवंशी ने कहा कि यहां से लेकर दिल्ली तक भाजपा की सरकार है,सांसद चाहे तो तत्काल इसे प्रारम्भ करा सकते है,विधायक और सांसद मिल कर मिल का विकास करने के लिए युद्ध स्तर पर प्रयास करे एवं मिल को पुनर्जीवित करे।*

रघुवंशी ने कहा कि विगत चुनाव के पूर्व मजदुरो जो वेतन दिया गया,उसमें भी इनकी नियत केवल वोट कबाड़ने की थी,चुनाव खत्म वेतन खत्म,।मजदूरों को घर बैठे आधे वेतन की आवश्यकता नही है वे काम करके अपना हक लेना चाहते है।

इंटक अध्यक्ष  रफीक गुल मोहम्मद ने कहा कि 2017 से आज तक बंद पड़ी मिल में जंग लग गए,पूर्व केंद्रीय मंत्री श्री अरुण यादव ने इस मिल को पुनर्जीवित करने के लिए 100 करोड़ रु.दिलाये जिससे जो मशीनरी आई उसे भी भाजपा के राज में जंग लग गया।अब ये भाजपाई केवल मजदूरों की मदद का बहाना बना कर रोटिया सेकने का प्रयास कर रहे है।*

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